Indian Constitution Regulating Act to Morley Minto Act

Historical Background Of Indian Constitution

  •   भारत मे साम्यवाद आंदोलन के प्रणेता कौन थे ?
  •    एम एन राय
  •    किनके सुझाव को ध्यान में रखकर संविधान सभा का गठन किया गया ?
  • एम एन राय द्वारा सन 1934 में दिए गए सुझाव के कारण

  •  1773 के रेगुलेटिंग एक्ट की क्या विशेषताएं थी ?

  • बंगाल के गवर्नर के पद को बदल कर गवर्नर जनरल कर दिया गया ।
  • Warren Hasting को पहला बंगाल का गवर्नर जेनेरल बनाया गया ।
  • बॉम्बे और मद्रास के गवर्नर को बंगाल के गवर्नर जनरल के अधीन कर दिया गया 
  • 1774 में कलकत्ता में उच्चतम न्यायालय की स्थापना की गई जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीश थे
  • कंपनी के कर्मचारियों को निजी व्यापार करने और उपहार लेने तथा रिश्वत लेना प्रतिबंधित कर दिया गया
  • कोर्ट ऑफ डाइरेक्टर्स ( court of directors) को एक governing body के रूप में बनाकर केंद्रीकरण की दिशा में यह पहला कदम था। यह समस्त नागरिक, राजश्व, और सैन्य मामले को नियंत्रित करता था।
  • 4 सदस्यों वाली कार्यकारिणी परिषद का गठन किया गया।

Act of Settlement (एक्ट ऑफ सेटलमेंट)

1781 के संवैधानिक संसोधन अधिनियम को एक्ट ऑफ सेटलमेंट अधिनियम कहते है ।


Indian Constitution Regulating Act to Morley Minto Act

Pitts India Act 1784

  • राजनैतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक किया।
  • नियंत्रण बोर्ड (Board of Control) बनाया गया जिसके जरिये राजनीतिक विषयों पर management किया जा सके।
  • Court of Directors (व्यापारिक मामलों) और Board of Control (राजनीतिक मामलों के लिए) बनने से द्वैध शाशन व्यवस्था का सुभारम्भ हुआ।

Charter Act of 1813

  • कंपनी के अधिकार पत्र को 20 वर्षो के लिए बढ़ा दिया गया ।
  • कंपनी के भारत के साथ व्यापार करने के एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया। किन्तु उसे चीन के साथ व्यापार एवं पूर्वी देशों के साथ चाय के व्यापार के संबंध में 20 वर्षों के लिए एकाधिकार प्राप्त रहा।
  • इस एक्ट में प्रत्येक वर्ष शिक्षा पर एक लाख रुपये खर्च करने की बात कही गयी।

Charter Act of 1833

  • बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया।
  • इसके द्वारा कंपनी के व्यापारिक अधिकार पुर्णतः समाप्त कर दिए गए। अब कम्पनी का कार्य ब्रिटिश सरकार की ओर से मात्र भारत पर शाशन करना रह गया।
  • मद्रास और बंबई के गवर्नर को विधायी संबंधी शक्ती से वंचित कर दिया ।
  • इससे पहले बनने वाले कानून को नियामक कानून कहा जाता था लेकिन अब बनाये गए कानून को अधिनियम या Act कहा जाने लगा ।
  • भारत मे दास प्रथा को विधि विरुद्ध घोसित कर दिया गया तथा 1843 में उसका उन्मूलन कर दिया गया ।
  • गवर्नर जनरल की परिषद को राजस्व के संबंध में पूर्ण अधिकार प्रदान करते हुए गवर्नर जनरल को सम्पूर्ण देश के लिए एक ही बजट तैयार करने का अधिकार दिया गया ।
  • भारतीय कानूनों का वर्गीकरण किया गया और इसके लिए विधि आयोग की नियुक्ति की व्यवस्था की गई।
  • Lord Macaulay की अध्यक्षता में प्रथम विधि आयोग का गठन भी किया गया ।

Charter Act of 1853

  • पहली बार गवर्नर जेनरल की परिषद के विधायी एवं प्रशाशनिक कार्यों को अलग किया गया।
  • 6 नए पार्षद को जोड़कर विधान परिषद का गठन किया गया।पहले 4 सदस्य + 6 नए सदस्य = विधान परिषद
  • सिविल सेवकों की भर्ती एवं चयन हेतु खुला प्रतियोगिता शुरू किया गया जिसमें भारतीयों को भी शामिल करने की व्यवस्था की गई।
  • 1854 में सिविल सेवको के संबंध में Macaulay Committe की नियुक्ति की गई ।
  • पहली बार भारतीय विधान परिषद में स्थानीय प्रतिनिधित्व प्रारम्भ किया।
  • परिषद की 6 नए सदस्यों में से 4 का चुनाव बंगाल ,मद्रास, बॉम्बे और आगरा की स्थानीय प्रांतीय सरकारों द्वारा किया जाना था।

1858 का भारत शासन अधिनियम

  • इसे भारत के शासन को अच्छा बनाने वाला अधिनियम कहा गया।
  • इस कानून ने East India Company को समाप्त कर दिया।
  • शासन सीधे महारानी विक्टोरिया के अधीन चला गया।
  • भारत के गवर्नर जनरल के पद को बदल कर भारत का वाइसराय कर दिया गया ।
  • Lord Canning भारत के प्रथम वाइसराय बनाये गए।
  • इस अधिनियम ने Board of Control और Court of directors. को समाप्त कर दिया ।
  • एक नए पद भारत का सचिव (Secretary of India) का सृजन किया गया।
  • भारत के प्रशासन पर इसका सम्पूर्ण नियंत्रण था।
  • एक 15 सदस्यी सलाहकार समिति का गठन किया गया जिसका अध्यक्ष भारत सचिव को बनाया गया।
  • मुग़ल सम्राट के पद को समाप्त कर दिया गया।

1861 का भारत परिषद अधिनियम

  • इसके द्वारा कानून बनाने की प्रक्रिया में भारतीय प्रतिनिधियों को शामिल करने की शुरुआत हुई।
  • इसमे वाइसराय विस्तारित परिषद में गैर सरकारी सदस्यों के रूप में नामांकित कर सकता था।
  • 1862 में Lord Canning तीन भारतीयों को जैसे बनारस के राजा ,पटियाला के महाराजा ,और सर दिनकर रॉव को विधान परिषद में मनोनीत किया।
  • विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत हुई , बम्बई और मद्रास प्रेसिडेन्सियों को बिधायी शक्तियां पुनः देकर।
  • इस विधायी विकास की नीति के कारण 1937 तक प्रान्तों तक सम्पूर्ण आंतरिक स्वायत्ता हासिल हो गई।
  • 1862 में बंगाल में विधान परिषद का गठन हुआ।
  • 1866 में उत्तर पश्चिम सीमा प्रान्त में विधान परिषद का गठन 
  • 1897 में पंजाब में विधान परिषद का गठन हुआ।
  • Portfolio प्रणाली जो Lord Canning द्वारा 1859 प्रारम्भ की गई थी उसे भी मान्यता दी।
  • Ordinance ( अध्यादेश) - पहली बार गोवेर्नर जनरल को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गई। ऐसे अध्यादेश की अवधि मात्र 6 महीने की होती थी।

1873 का अधिनियम

  • इस अधिनियम द्वारा यह उपबंध किया गया कि East India Company को किसी भी समय भंग किया जा सकता है।
  • 1 जनवरी 1884 को ईस्ट इंडिया कम्पनी को औपचारिक रूप से भंग कर दिया गया था।

1876 का अधिनियम

  • इसे शाही उपाधि अधिनियम भी कहते हैं।
  • इस अधिनियम द्वारा गवर्नर जनरल की केन्द्रीय कार्यकारिणी में छठे सदस्य की नियुक्ति कर उसे लोक निर्माण विभागक कार्य सौंपा गया।
  • 28 अप्रैल 1876 को एक घोषणा द्वारा महारानी विक्टोरिया को भारत का सम्राज्ञी घोसित किया गया।

1892 का भारत शासन अधिनियम

  • केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषद में गैर सरकारी सदस्यों की संख्यां बढ़ाई गई हालांकि बहुमत सरकारी सदस्यों का ही रहता था।
  • Budget - विधान परिषद के कार्यों में वृद्धि कर उन्हें बजट पर बहश करने और कार्यपालिका के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए अधिकृत किया गया।
  • वाइसराय को नामांकन की शक्ति दी गई , जैसे गैर सरकारी सदस्यों ,केंद्रीय विधान परिषद में और बंगाल चैम्बर ऑफ कॉमर्स में ।
  • गवर्नर को भी प्रान्तों में गैर सरकारी सदस्यों का नामांकन की शक्ति दी गई।
  • इस अधिनियम ने केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों में गैर सरकारी सदस्यों की नियुक्ति के लिए सीमित और परोक्ष रूप से चुनाव का प्रावधान किया ।हालांकि चुनाव शब्द का प्रयोग इस अधिनियम में नही हुआ। अर्थात अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली की शुरुआत हुई।

1909 का भारत परिषद अधिनियम

  • इसे मोर्ले मिंटो सुधार के नाम से जाना जाता है।
  • Lord Morley इंग्लैंड में भारत के राज्य सचिव थे और Lord Minto भारत के वाइसराय थे।
  • केंद्रीय विधान परिषद के आकार में वृद्धि हुई।इनकी संख्या 16 से 60 हो गई थी। जबकि प्रांतीय विधान परिषद में इनकी संख्या एक समान नही थी।
  • केंद्रीय विधान परिषद में सरकारी सदस्यों की बहुमत को बनाये रखा।
  • जबकि प्रांतीय विधान परिषद में गैर सरकारी सदस्यों के बहुमतों की अनुमति थी ।
  • विधान परिषद के चर्चा कार्यों का दायरा बढ़ाया गया , जैसे अनुपूरक प्रश्न पूछना, बजट पर संकल्प रखना आदि।
  • पहली बार किसी भारतीय को वाइसराय और गवर्नर के कार्य परिषद के साथ एसोसिएशन बनाने का प्रावधान किया गया।
  • Satyendra Prasad Sinha वाइसराय की कार्यपालिका परिषद के प्रथम भारतीय सदस्य बने। उन्हें विधि सदस्य बनाया गया।
  • पृथक निर्वाचन के आधार पर मुस्लिमो को सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व का प्रावधान किया।

1919 का भारत शासन अधिनियम

  • इसे Montague Chelmsford सुधार भी कहते हैं।
  • Lord Montague भारत के राज्य सचिव थे और Lord Chelmsford भारत के वाइसराय थे।
  • केंद्रीय और प्रांतीय विषयों की सूची को पहचान कर उन्हें पृथक कर राज्यों पर केंद्रीय नियंत्रण कम किया गया।
  • प्रान्तीय विधानपरिषद को विधान बनाने का अधिकार प्रदान किया गया लेकिन सरकार का ढांचा जेन्द्रीय और एकात्मक ही बना रहा।
  • केंद्र में द्विसदनात्मक विधायिका की स्थापना की गई - प्रथम राज्य परिषद तथा दूसरी केन्द्रीय विधान विधान सभा।
  • राज्य परिषद के सदस्यों की संख्या 60 थी जिसमे 34 निर्वाचित होते थे और उनका कार्यकाल 5 वर्षों तक होता था।
  • केंद्रीय विधान सभा के सदस्यों की संख्या 144 थी जिनमे 104 निर्वाचित तथा 40 मनोनीत होते थे। इनका कार्यकाल 3 वर्षों का था।
  • दोनों सदनों को बराबर शक्ति दी गई थी परन्तु बजट पर स्वीकृति प्रदान करने का अधिकार केवल निचले सदन को था।
  • लियोनस कर्टियस को प्रान्तों में द्वैध शासन प्रणाली का प्रवर्तक कहा जाता है।
  • इस योजना के अनुसार प्रांतीय विषयों को दो भागों में विभाजित किया गया : (1)  आरक्षित और (2) हस्तानांतरित विषय।
  • आरक्षित विषय : वित्त, भूमि कर, न्याय, अकाल सहायता, पुलिस, पेंशन, आपराधिक जातियां,छापाखाना, समाचार पत्र, सिंचाई, जलमार्ग, खान, कारखाना, बिजली, गैस, बायलर, श्रमिक कल्याण, औद्योगिक विवाद, मोटर गाड़ी, छोटे बंदरगाह और सार्वजनिक सेवाएं आदि।
  • हस्तांतरित विषय : शिक्षा, पुस्तकालय, संग्रहालय, स्थानीय स्वायत्त शासन, चिकित्सा सहायता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, आबकारी उद्योग, तौल और माप, सार्वजनिक मनोरंजन पर नियंत्रण, धार्मिक तथा अग्रहार दान आदि।
  • आरक्षित विषय पर प्रशासन गवर्नर और उसकी कार्यकारी परिषद के माध्यम से किया जाता था।
  • हस्तानांतरित विषयों का प्रशासन गवर्नर द्वारा विधान परिषद के प्रतिउत्तरदायी मंत्रियों की सहायता से किया जाता था।
  • इस द्वैध शासन की समाप्ति 1935 के एक्ट के द्वारा की गई ।
  • इस अधिनियम द्वारा पहली बार महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला।
  • भारत सचिव को यह अधिकार दिया गया कि वह भारत के महालेखा परीक्षक की नियुक्ति कर सकता है।
  • इस अधिनियम के जरिये भारत मे एक लोक सेवा आयोग के गठन का प्रावधान किया। अतः 1926 में Lee Ayog  की सिफ़ारिश पर सिविल सेवकों की भर्ती UPSC का गठन किया गया।
  • वाइसराय की कार्यकारिणी पतिषद में 6 सदस्यों में से 3 सदस्यों का भारतीय होना आवश्यक था।
  • पहली बार केंद्रीय बजट को राज्य बजट से अलग कर दिया गया।
  • एक वैधानिक आयोग का गठन किया गया जिसका कार्य प्रत्येक 10 वर्ष बाद जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रस्तूत करना था ।

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