Mahmud of Ghazni History in Hindi

Mahmud of Ghazni History in Hindi | महमूद गजनवी , जिसने सत्रह  बार भारत में मचाई लुट लेकिन किया नही कभी राज

Mahmud of Ghazni History in Hindi



गज़नी के शासक  सुबुक्तगीन के पुत्र महमूद ग़ज़नवी का जन्म 2 नवम्बर 971 ई , में हुआ था। सुबुक्तगीन ने अपने पुत्र को बचपन से ही  युद्ध कला और प्रशासन की अच्छी से अच्छी शिक्षा दी।  लेकिन  बाद में महमूद और सुबुक्तगीन के बीच  सम्बन्ध अच्छे नहीं रहे  जिसके कारण सुबुक्तगीन ने इस्माइल को अपना उत्तराधिकारी चुना। महमूद गज़नी  इस  फैसले से बिलकुल खुश नहीं था  और उसने अपने पिता की मृत्यु के तुरंत  बाद इस्माइल पर आक्रमण कर उसे बंदी बना लिया , और साथ ही  बग़दाद के खलीफा कादिर बिल्लाह से स्वतंत्र रूप से शासन करने की इज़ाज़त ले ली।  महमूद बहादुर और कट्टरपंथी मुसलमान होने के साथ साथ लालची व्यक्ति भी था।  अपनी अभिलाषाएं वह भारत को लूट कर पूरी करना चाहता था इसलिए उसने भारत पर आक्रमण किया।

महमूद ग़ज़नवी ने 1000 से 1026 ई के मध्य भारत पर कुल 17 बार आक्रमण किये जिनमे से कुछ प्रमुख आक्रमण इस प्रकार है।  

जयपाल के विरूद्ध युद्ध (1001 ई )


पंजाब का राजा जयपाल उन खोये हुए प्रदेशों को पुनः प्राप्त करने की कोशिश कर रहा था जो महमूद गज़नी के पिता ने उससे छीन लिए थे , अतः महमूद ने 1001 ई में पंजाब पर आक्रमण किया , 28 नवम्बर 1001 ई को पेशावर के निकट युद्ध हुआ जिसमे जयपाल पराजित हुआ और लगभग 15000 हिन्दू सैनिक हताहत हुए और जयपाल को उसके प्रमुख 15 सहयोगियों के साथ के साथ  गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन 25000 दीनार लेकर छोड़ दिया गया।  जयपाल यह अपमान सहन न कर सका और उसने आत्मदाह कर लिया।


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आनंदपाल के विरुद्ध युद्ध ( 1008 ई ) 

  
जयपाल को  पराजित  करने के बाद महमूद ग़ज़नवी भेंड़ा और मुल्तान जितने में व्यस्त हो गया लेकिंन दूसरी तरफ जयपाल का उत्तराधिकारी आनंदपाल महमूद ग़ज़नवी पर आक्रमण करने की तैयारी करने में व्यस्त था , उसने उज्जैन , ग्वालियर , कालिंजर ,कन्नौज, दिल्ली और अजमेर के 6 राजाओं का संगठन तैयार किया जिसमे हिन्दू स्त्रियों ने सेना तैयार करने में अपने गहने तक दे दिए थे।  इस प्रकार महमूद का सामना करने के लिए एक बड़ी राजपूत सेना तैयार थी।  सन 1008 ई में दोनों सेनाओं ने पुनः पेशावर के निकट आमने सामने आ खड़ी हुई। प्रारम्भ में तो राजपूत हावी रहे और उन्होंने लगभग 4000 मुस्लिम सैनिकों को मार डाले , लेकिन आनंदपाल का हाथी बिच युद्ध में बिगड़ गया और युद्ध भूमि से भाग गया।  इसका परिणाम यह हुआ की राजपूत सेना में भगदड़ मच गई और मुसलमानो ने राजपूतों को दो दिन  तक वध किया और महमूद विजयी हुआ।  इस विजय ने महमूद को पंजाब और उत्तर पश्चिम भारत का स्वामी बना दिया।

नगरकोट का आक्रमण (1009 ई )

नगरकोट का आक्रमण (1009 ई )


नगरकोट पर महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण का प्रमुख कारण महमूद का लालच था।  वह जानता था की कांगड़ा और नगरकोट के मंदिरों में अपार सम्पदा है ,महमूद ग़ज़नवी ने 1009 ई में कांगड़ा और नगरकोट पर आक्रमण किया , यहाँ हिन्दू शाशक उसका मुकाबला नहीं कर सके और गाजर मूली की तरह काट दिए गए , हिन्दुओं ने डर के कारण  मंदिरों के दरवाजे खोल दिए और भूमि पर लेट गए।  आक्रमणकारी उनपर बाज़ की तरह टूट गए। महमूद ने यहाँ से अपार सम्पदा लूटी और गज़नी ले गया। 

थानेश्वर का आक्रमण (1014ई )

1009 ई से 1014 ई के मध्य महमूद ने मुल्तान , अलवर ,और कश्मीर पर आक्रमण किये और अथाह संपत्ति लूटी। महमूद ने थानेश्वर के मंदिरों के विषय में सुन रखा था , इसलिए उसने 1014 ई में थानेश्वर पर आक्रमण किया।  यहाँ भी वही हश्र जो नगरकोट के मंदिरों और वहां के वाशियों का हुआ था। 

मथुरा और कन्नौज पर आक्रमण (1018 -19 ई )


 कन्नौज उस समय का सर्वाधिक शक्तिशाली हिन्दू राज्य था। इसलिए महमूद उसको  पराजित करने के लिए 1018 ई में उसपर आक्रमण करने चल दिया।  मार्ग में जितने भी नगर पड़ें उन सभी को लूटा। इसके पश्चात उसने जनवरी 1019 ई में कन्नौज के दरवाजे पर दस्तक दी।  कन्नौज के प्रतिहार शासक राज्यपाल ने आतंकित होकर बिना विरोध किये समर्पण कर दिया फिर भी संपूर्ण नगर को रौंध डाला गया। 

कालिंजर पर आक्रमण (1021 ई )

कालिंजर पर आक्रमण (1021 ई )


प्रतिहार शासक राज्यपाल की कायरता और समर्पण से अन्य राजपूत शासक क्रोधित हुए।  जैसे ही महमूद वापस हुआ कालिंजर के चंदेल शासक गण्ड ने ग्वालियर के राजा के सहयोग से कन्नौज पर आक्रमण किया और राज्यपाल को मार डाला। अपने अधीनस्त शासक को पराजित देखकर महमूद का उत्तेजित होना स्वाभाविक था अतः उसने चंदेल के शासक पर आक्रमण करने के लिए भारत की ओर प्रस्थान किया।  महमूद का सामना करने के लिए चंदेल शासक ने एक बड़ी सेना तैयार की परन्तु  महमूद को सामने देखकर वह हताश हो गया और अपना सारा सामान छोड़कर भाग गया।  महमूद लूट का माल लेकर सदा की भांति गज़नी वापस आगया।

सोमनाथ पर आक्रमण (1025 ई )

सोमनाथ पर आक्रमण (1025 ई )

महमूद का सोलहवां और सबसे महत्वपूर्ण आक्रमण सोमनाथ पर 1025 ई में हुआ।  गुजरात के काठियावाड़ में स्थित सोमनाथ हिन्दुओं का पवित्र तीर्थ स्थल था।  यहाँ सोमनाथ जी का वैभवशाली मंदिर था जहाँ अपार धन सम्पदा थी , जो की महमूद के लालच का प्रमुख कारण थी।  महमूद 80000 की विशाल सेना लेकर गज़नी से चला और मुल्तान और राजपुताना होते हुए अन्हिलवाड़ा पहुंचा।  सोमनाथ  मंदिर का प्रमुख आकर्षण सोमनाथ की मूर्ति थी जो बिना किसी के सहारे हवा में लटकी हुई थी। समीपवर्ती क्षेत्र के सभी राजकुमार मंदिर में एकत्रित हो गए और गज़नी का डट कर मुकाबला किया , तीन बार तो उन्होंने महमूद के आक्रमण को विफल कर दिया , लेकिन चौथी बार महमूद सफल हो गया।  उसने हज़ारों हिन्दुओ को तलवार के घाट उतार दिया और मंदिर में प्रविष्ट हुआ।  इस मंदिर से अपार धन सम्पदा उसके हाथ लगी


महमूद का सत्रहवाँ और अंतिम आक्रमण (1027 ई )



महमूद का अंतिम आक्रमण जाटों के विरुद्ध था क्योंकि जब अन्हिलवाड़ा  से सिंध होकर गज़नी वापस लौट रहा था तब सिंध के जाटों ने उसे काफी परेशान किया था। अतः वह इसका बदला लेने के लिए सन 1027 ई में अंतिम आक्रमण किया जिसमे उसने जमकर जाटों का संहार किया

महमूद  ग़ज़नवी  की मृत्यु 


30 अप्रैल 1030 को महमूद गजनवी (Mahmud Ghaznavi) की 59 साल की उम्र में मौत हो गयी | सुल्तान महमूद गजनवी को अपने अंतिम आक्रमण के दौरान मलेरिया हो गया था।  गजनवी साम्राज्य उसकी मौत के बाद 157 वर्ष तक चला | गजनवी साम्राज्य के ज्यादातर हिस्से पर बाद में सेल्जुल साम्राज्य ने राज किया था | 1150 ईस्वी में मुह्म्द्द गौरी ने गजनी पर कब्जा कर लिया |


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